सिजेरियन डिलीवरी बनता जा रहा है गोरख धंधा, मेनका गांधी ने संभाला मोर्चा

डिलीवरी के समय यदि स्थिति सामान्‍य न हो तो डॉक्‍टर ऑपरेशन से प्रसव करवाते हैं, मेडिकल की भाषा में इसे सिजेरियन डिलीवरी कहते हैं। अब यह एक घोटाले का रूप लेता जा रहा है। अस्‍पताल बड़े बिल बनाने के लालच में जरूरत न होने पर भी सिजेरियन डिलीवरी करने लगे हैं इससे आम लोगों की जेब पर तो असर पड़ता ही है साथ ही महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य पर भी बुरा असर होता है। यह मुद्दा महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने उठाया है। एक ऑनलाइन याचिका का संज्ञान लेते हुए मेनका गांधी ने स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री श्री जेपी नड्डा को एक पत्र लिखकर कहा कि अस्‍पतालों को इस बात के लिए बाध्‍य किया जाना चाहिए कि वो वहां हो रहे सिजेरियन डिलीवरी के आंकड़ों को सार्वजनिक करें।

उन्‍होंने कहा कि अब हमारे अस्‍पतालों में सिजेरियन डिलीवरी घोटाले का रूप धारण कर रही है। अगर इसमें लगाम न लगाई गई तो परिणाम घातक होते जाएंगे। उन्‍होंने सिजेरियन डिलीवरी की वजह से मां और बच्‍चे दोनों की सेहत पर पड़ने वाले घातक परिणामों को मुद्दा बनाया। मातृत्‍व स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़े कई महत्‍वपूर्ण मुद्दों को इनमें शामिल किया गया जिन पर ध्‍यान देने की जरूरत है।

अस्‍पताल करें इन आंकड़ों को सार्वजनिक

मेनका ने पत्र लिखकर स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय से अनुरोध किया कि इस मामले पर गौर किया जाए। पत्र में उन्‍होंने ये अपेक्षा की है कि जल्‍द से जल्‍द अस्‍पतालों को इस संबध में दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे कि अस्‍पताल प्रशासन आंकड़े जारी करके यह सूचना सार्वजनिक करेंगे कि उनके यहाां होने वाली डिलीवरी में से कितनी सिजेरियन हैं और कितनी नॉर्मल।

इस संबंध में ऑन लाइन हस्‍ताक्षर अभियान चलाने वाली सुबर्ना का मानना है कि इन आंकड़ों के आधार पर लोगों को खासकर महिलाओं को अपनी डिलेवरी के लिए अस्‍पताल के चयन करने में आसानी हो जाएगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने इस ऑनलााइन याचिका को ऑनलाइन करने वाली कंपनी चेंज डॉट ओआरजी के कार्यालय जाकर मुलाकात की और इस समस्‍या को गंभीर मानकर इस पर आगे कार्यवाही करने का आश्‍वासन भी दिया।

मानकों से कहीं ऊपर है आंकड़ा

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मानकों के अनुसार सीजेरियन डिलीवरी देश पूरे देश में सिर्फ दस से पंद्रह फीसदी तक ही होनी चाहिए। जबकि राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा देश के सरकारी और प्राइवेट अस्‍पतालों में कहीं ज्‍यादा है। तेलंगाना में 58 फीसदी और तमिलनाड में 34.1 फीसदी तक सी‍जेरियन डिलीवरी होने के आंकड़े हैं जबकि सिफ निजी अस्‍पतालों की बात करें तो वहां 74 प्रतिशत प्रसव ऑपरेशन से कराए जा रहे हैं। पश्‍चिम बंगाल में भी यह आंकड़ा 70 के आसपास है।

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