मनरेगा में है बहुत संभावनाएं

Hindi7 |
Author Ajit Kumar Yash |
  06 July 2011 |

Hindi7.com।। सरकार द्वारा ग्रामीण भारत के विकास के उद्देश्य से राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून बनाया गया, जिसका संक्षिप्त नाम नरेगा है। इस कानून को अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून कहा जाता है, अतः इसका संक्षिप्त नाम भी मनरेगा हो गया है। यह कानून 25 अगस्‍त 2005 को पारित किया गया तथा इसे सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राज्‍य सरकारों के साथ मिलकर क्रियान्‍वित किया जा रहा है। यह कानून हर वित्‍तीय वर्ष में इच्‍छुक ग्रामीण परिवार के किसी भी वयस्‍क को सार्वजनिक कार्य करने और न्‍यूनतम भत्‍ता प्राप्त करने का अधिकार देता है। वर्ष भर में 100 दिनों की रोजगार की कानूनी गारंटी देना ही इस कानून का मुख्य लक्ष्य है। यह योजना प्राथमिक तौर पर गरीबी रेखा से नीचे रह रहे अर्द्ध या अकुशल ग्रामीण लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ाने के उद्देश्‍य के साथ शुरू किया गया था। यह देश में अमीर और गरीब के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास था। ग्रामीण परिवारों के वयस्‍क सदस्‍य अपने नाम, आयु प्रमाण, फोटो और घर के पते के साथ सभी जरुरी कागज ग्राम पंचायत के पास जमा करवाते हैं। ग्राम पंचायत परिवारों की जांच-पड़ताल करने के बाद एक जॉब कार्ड जारी करता है। जॉब कार्ड पर पंजीकृत वयस्‍क सदस्‍य की पूरी जानकारी उसकी फोटो के साथ होती है। पंजीकृत व्‍यक्ति काम के लिए लिखित में आवेदन पंचायत या कार्यक्रम अधिकारी के पास जमा करा सकता है, परंतु इस बात का ध्यान अवश्य ही रखा जाना चाहिए कि आवेदन कर्ता कम से कम 14 दिन तक लगातार काम कर सके।

इसके बाद पंचायत/कार्यक्रम अधिकारी वैध आवेदन को स्‍वीकार करेगा और आवेदन की पावती, तारीख समेत जारी करेगा। काम उपलब्‍ध कराने संबंधी पत्र आवेदक को भेज दिया जाएगा और पंचायत कार्यालय में नोटीस बोर्ड पर प्रेषित कर दिया जाएगा। इच्छुक व्यक्ति को रोजगार पांच किलोमीटर के दायरे के भीतर उपलब्‍ध कराया जाएगा और यदि किसी कारण व्यक्ति को पांच किलोमीटर के दायरे से बाहर जाना होता है, तो उसके बदले में अतिरिक्‍त भत्‍ता दिया जाएगा।

नरेगा में ग्राम पंचायतों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले तो ग्राम पंचायतों को पंजीकरण के आवेदनों की छंटनी कर उन्हें पंजीकृतकरना है। इसका मतलब है संभावित मजदूरों का पंजीकरण करना, उन्हें जाब कार्ड जारी करना, रोजगार के लिए दिए गए आवेदनों को प्राप्त करना, उन्हें कार्यक्रम अधिकारी को भेजना और काम उपलब्ध हो तो आवेदकों को उसकी सूचना देना। पंजीकरण और रोजगार पाने के आवेदन सीधे कार्यक्रम अधिकारी को भी प्रेषित किए जा सकते हैं, पर उम्मीद सामान्य रूप से यही होती है कि वे ग्राम पंचायत के स्तर पर ही जमा किए जाएंगे। उम्मीद यह रखी गई है कि ग्राम पंचायत, ग्राम सभा की अनुशंसाओं के आधार पर अपने ग्राम के लिए एक विकास योजनाबनाएगी और रोजगार गारंटी योजना के तहत संभावित कार्योंकी सूची तैयार करेगी। इसके बाद जब कार्यक्रम अधिकारी परियोजनाओं की स्वीकृति देगा तो ग्राम पंचायत उन्हें क्रियान्वित भी करेगी। इन परियोजनाओं से संबंधित सभी दस्तावेज मास्टर रोल के साथ ग्राम सभा को सामाजिक अंकेक्षण के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। रोजगार गांरटी योजना के तहत ग्राम पंचायत द्वारा क्रियान्वित करवाए गए सभी कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी ग्राम सभा तथा कार्यक्रम अधिकारी की होगी। 

अब बात करते हैं सुरक्षा और बीमा की, मनरेगा में श्रमिकों को स्वच्छ पेयजल, बच्चों के लिए शेड, विश्राम के लिए समय, प्राथमिक उपचार बॉक्स के साथ कार्य के दौरान घटित किसी आकस्मिक घटना का सामना करने के लिए अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएगी। मनरेगा में दुर्घटना की स्थिति में यदि कोई कामगार कार्यस्थल पर कार्य के दौरान घायल होता है तो राज्य सरकार की ओर से वह निःशुल्क चिकित्सा सुविधा पाने का हकदार होगा। नरेगा में घायल मजदूर को अस्पताल में भर्ती करवाने पर संबंधित राज्य सरकार द्वारा संपूर्ण चिकित्सा सुविधा, दवा, अस्पताल में निःशुल्क बेड उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, घायल व्यक्ति प्रतिदिन कुल मजदूरी राशि का 50 प्रतिशत पाने का हकदार भी होगा। मनरेगा में कार्यस्थल पर दुर्घटना के कारण पंजीकृत मजदूर की स्थायी विकलांगता या मृत्यृ हो जाने की स्थिति में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित राशि या 25 हजार रुपये पीड़ित व्यक्ति के परिवार को दी जाएगी।

मनरेगा में अधिनियम के अंतर्गत दो तरह की प्रणाली लागू है। यदि मजदूरों को ठेके के आधार पर भुगतान किया जाता है तो उसका निर्धारण इस प्रकार किया जाएगा कि किसी व्यक्ति को सात घंटे तक काम करने के बाद न्यूनतम मजदूरी प्राप्त हो सके। 

इस योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है कि स्थायी संपत्ति का सृज़न किया जाए और ग्रामीण परिवारों के आजीविका साधन आधार को मजबूत बनाया जाए।

 

नरेगा की वेबसाइट पर ऑनलाइन जन शिकायत निपटारा प्रणाली के जरिए आप अपने क्षेत्र में नरेगा से सम्बन्धित मुद्दों पर शिकायत दर्ज कराने में लोगों की मदद कर सकते हैं।

अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए आप http://nrega.nic.in/statepage.asp?check=pgr पर क्लिक करें और अपने राज्य का चुनाव कर, शिकायत दर्ज कराने के लिए निर्देशों का पालन करें।

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