Home देश हार से पस्त भारतीय ओवल पर अपना सम्मान बचाने के लिए उतरेंगे

हार से पस्त भारतीय ओवल पर अपना सम्मान बचाने के लिए उतरेंगे

लंदन ।। भारत-इंग्लैंड के बीच चौथा व अंतिम क्रिकेट टेस्ट ओवल के मैदान पर गुरूवार को खेला जाएगा। यह मैच भारतीय समयानुसार दोपहर साढ़े तीन बजे से शुरू होगा। टेस्ट क्रिकेट में अपनी बादशाहत गंवा चुका भारत अपने बचे-खुचे सम्मान को बचाने के लिए इस टेस्ट को खेलेगा। भारत पिछले 44 सालों से 4-0 के व्हाइटवाश की शर्म को नहीं झेला है। ऐसे में इस टेस्ट को जीतना जरूर चाहेगी।

भारतीय टीम चोटों की समस्याओं से घिरी है। टेस्ट श्रृंखला गंवाने के बाद पूरे देश में धोनी टीम की आलोचना हो रही हैं। टीम इंडिया दुनिया की नंबर एक टेस्ट रैंकिंग के साथ इस श्रृंखला में खेलने उतरी थी। पहले तीन टेस्ट मैचों में लगातार करारी शिकस्त से उसकी टेस्ट में बादशाहत छिन गई।

श्रृंखला में अब तक अपने निराशाजनक प्रदर्शन से कड़ी आलोचनाएं झेल रही भारतीय टीम, अगर इस मैच में हार गई तो वह टेस्ट रैंकिंग में खिसककर दक्षिण अफ्रीका के पीछे तीसरे नंबर पर पहुंच जाएगी।

वही कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ओवल में जीत से वापसी करने के लिए बेताब है, क्योंकि इससे शुरू होने वाले पांच मैचों की वनडे श्रृंखला से पहले आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। धोनी को बतौर कप्तान पहली बार किसी टेस्ट श्रृंखला में हार का मुंह देखना पड़ा है।

भारत को 79 वर्षों के दौरान चार या इससे ज्यादा टेस्ट में पूरी तरह से वाइटवाश का सामना केवल तीन बार करना पड़ा है। इससे पहले उसे इंग्लैंड ने 1959 में और वेस्टइंडीज से 1961-62 में 5-0 से हराया था। आस्ट्रेलिया से 1967-68 से 4-0 की शिकस्त का मुंह देखना पड़ा था।

भारत को इससे पहले तीन बार 3-0 की हार का सामना करना पड़ा है। जिसमें उसे दो बार 1967 और 1974 में इंग्लैंड से और 1999-2000 में आस्ट्रेलिया से पराजय मिली है।

टीम इंडिया ने हालांकि अच्छी खबर यह है कि श्रृंखला का अंतिम टेस्ट ओवल में खेला जाएगा, जो बड़े स्कोर के लिए मशहूर है और इस मैदान पर मेहमान टीम का रिकार्ड भी काफी अच्छा है।

ओवल पर भारत ने 10 में से केवल दो मैच गंवाया है। ओवल ही वह मैदान है, जिस पर अजित वाडेकर की अगुवाई वाली टीम ने 1971 में इंग्लिश सरजमीं पर देश को श्रृंखला में पहली जीत दिलाकर इतिहास रचा था।

इसी मैदान पर सुनील गावस्कर ने 1979 में यादगार 221 रन और राहुल द्रविड़ ने 2002 में 217 रन की पारी खेली थी। अनिल कुंबले ने 2007 में टेस्ट में अपना पहला शतक जड़ा था। ओवल पर ही सचिन तेंदुलकर ने अपना 100वां टेस्ट खेला था।

इसके अलावा भारतीय टीम इस बात से भी राहत महसूस कर सकती है कि इंग्लैंड की टीम अपने तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन की सेवाओं से महरूम हो सकती है, क्योंकि वह मांसपेशियों में खिंचाव से जूझ रहे हैं।

धोनी की सबसे बड़ी चिंता मशहूर बल्लेबाजी क्रम की फार्म होगी, जो अभी तक श्रृंखला की छह पारियों में 300 रन का आंकड़ा पार करने में असफल रहा है।

भारत को शुरू से ही अपनी सलामी बल्लेबाजी जोड़ी गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग से मिलने वाली शुरूआत की कमी खली है। सहवाग चोट के कारण पहले दो टेस्ट मैच में नहीं खेलने के बाद एजबेस्टन टेस्ट में खेले थे, लेकिन वह उछलती हुई गेंद से जूझते रहे।

मिस्टर भरोसेमंद राहुल द्रविड़ ही एकमात्र भारतीय बल्लेबाज हैं, जिन्होंने इंग्लैंड के कातिलाना आक्रमण के सामने कुछ मजबूती दिखाई है। उन्होंने अब तक श्रृंखला में दो शतक जड़े हैं।

वहीं सचिन तेंदुलकर भी अपनी फार्म हासिल नहीं कर पाए हैं, लेकिन उनकी निगाहें श्रृंखला में पहला सैकड़ा जमाकर 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों के जादुई आंकड़े को छूने पर लगी होगी।

भारत के संकटमोचक वीवीएस लक्ष्मण भी इंग्लिश हालातों में जूझ रहे हैं और युवा सुरेश रैना के स्थान को भी विराट कोहली से खतरा दिख रहा है, क्योंकि उन्होंने अब तक छह पारियों में केवल 105 रन बनाये हैं। धोनी के एजबेस्टन टेस्ट में प्रदर्शन के अलावा निचले क्रम से ज्यादा उम्मीद नहीं दिखती।

श्रृंखला में अब तक गेंदबाजी निराशाजनक रही है। चोटों से घिरे जहीर खान और फार्म से जूझ रहे हरभजन सिंह की अनुपस्थिति में ईशांत शर्मा की अगुवाई वाला भारतीय आक्रमण सामान्य दिख रहा है।

तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार की अंगुली में पिछले मैच में चोट लग गयी थी और उनका मैच में खेलना संदिग्ध लग रहा है। टीम प्रबंधन उन पर अंतिम फैसला लेने के लिये कल तक का इंतजार करेगी।

जहां इंग्लैंड के गेंदबाजों ने पहले तीन टेस्ट मैचों में तेज पिचों का पूरा फायदा उठाया,  वहीं भारतीय गेंदबाजों में पैनेपन के साथ विकेट चटकाने की क्षमता में भी कमी दिखी है। भारत की खराब गेंदबाजी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एजबेस्टन में इंग्लैंड को 700 रन से ज्यादा का स्कोर बनाने दिया।

दूसरी तरफ इंग्लैंड की टीम सभी विभागों में बेहतरीन दिखी है, चाहे वह बल्लेबाजी हो, गेंदबाजी हो या क्षेत्ररक्षण। एजबेस्टन टेस्ट से पहले शुरूआती दो टेस्ट मैचों में सलामी बल्लेबाजों का प्रदर्शन उनके लिए थोड़ी चिंता बना हुआ था, लेकिन एलिस्टेयर कुक ने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ 294 रन की पारी खेलकर और कप्तान एंड्रयू स्ट्रास ने धैर्यपूर्वक 87 रन की पारी से फार्म में वापसी का संकेत दिया है।

मेजबान टीम का मध्यक्रम भी शानदार दिखता है, जिसमें केविन पीटरसन, इयान बेल, इयोन मोर्गन और मैट प्रायर सभी श्रृंखला में शतक जड़ चुके हैं। इंग्लैंड के पुछल्ले बल्लेबाज भी पीछे नहीं रहे हैं, क्योंकि टिम ब्रेसनन और स्टुअर्ट ब्राड ने इस श्रृंखला में बल्ले से प्रभावित किया है।

एंडरसन की फिटनेस को छोड़कर इंग्लैंड के लिए ओवल टेस्ट से पहले कोई चिंता नहीं है। अगर एंडरसन नहीं खेलते तो भी इंग्लैंड के पास ब्रेसनन, ब्राड, स्टीव फिन और चोटिल क्रिस ट्रेमलेट की जगह शामिल हुए ग्राहम ओनियंस हैं।

ट्रेमलेट की अनुपस्थिति में स्ट्रास के लिए केवल एक सवाल होगा कि वह फिन को मौका दें या ओनियंस को। भारत के लिये ऑफ स्पिनर ग्रीम स्वान का इस मैदान पर शानदार प्रदर्शन एक चिंता की बात हो सकती है, जिन्होंने यहां दो टेस्ट में 15 विकेट झटके हैं।

जहां तक मौसम की बात है, पहले दिन बारिश की संभावना है, जबकि बाकी दिन मौसम ठीक-ठाक रहेगा।

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