केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एफएम कारोबार में विदेशी निवेश (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी संस्थागत निवेश) की सीमा 20 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी करने का फैसला भी किया है। दूरसंचार और मीडिया से जुड़े क्षेत्रों का नियमन करने वाले भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने पिछले साल जून में एफएम रेडियो और डीटीएच सैटेलाइट डिस्ट्रीब्यूशन और इंटरनेट टेलीविजन जैसी कुछ ब्रॉडकास्ट कैरिएज सेवाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था।
नीतियां उदार बनाए जाने की घोषणा के बाद शेयर बाजारों पर प्रसारण कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। नई व्यवस्था को पॉलिसी गाइडलाइंस ऑन एक्सपैंशन ऑफ एफएम रेडियो ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज थ्रू प्राइवेट एजेंसीज (फेज 3) नाम दिया गया है। यह देश के 227 अतिरिक्त शहरों में एफएम रेडियो सेवाओं का विस्तार करेगी और 294 शहरों में 839 नए एफएम रेडियो चैनलों की सेवा शुरू करने की गुंजाइश बनाएगी। विस्तार के तीसरे चरण में एक लाख और इससे ज्यादा आबादी वाले सभी शहरों में निजी एफएम रेडियो चैनल होंगे।
भारत के अग्रणी एफएम रेडियो चैनल रेडियो मिर्ची का मालिकाना हक रखने वाली ईएनआईएल के सीईओ प्रशांत पांडेय ने कहा कि विस्तार का तीसरा चरण एफएम को अखिल भारतीय माध्यम बना देगा क्योंकि इसके जरिए रेडियो छोटे कस्बों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा, ‘पिछले छह वर्षों से कोई विस्तार नहीं हुआ है। भविष्य में विस्तार के लिए यह नीति महत्वपूर्ण है।’
नई व्यवस्था के तहत एफएम चैनल खेलों, यातायात, मौसम, सांस्कृतिक आयोजनों, महोत्सवों, परीक्षा परिणामों, प्रवेश की सूचनाओं, करियर संबंधी सलाह और रोजगार के अवसरों से जुड़ी सूचनाओं का प्रसारण कर सकेंगे। हालांकि, इसमें शर्त यह है कि इनका ताल्लुक समाचार से नहीं होना चाहिए। पिछले साल 3जी और ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस लाइसेंस के आवंटन में दूरसंचार विभाग ने जो तरीका अपनाया था, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भी एफएम चैनलों के लाइसेंस की ई-नीलामी में वही तरीका अख्तियार करेगा। नीलामी दो चरणों में होगी और यह प्रक्रिया इसी वित्त वर्ष में पूरी कर ली जाएगी।
इस नई नीति को तैयार करने में करीब 3 साल लग गए। इसमें मालिकाना हक से जुड़ी शर्तें यथावत रखी गई हैं, यानी कुल एफएम स्टेशनों में किसी एक इकाई की हिस्सेदारी 15 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है। इस नीति में डी श्रेणी के शहरों में केवल 3 चैनलों की इजाजत है, जबकि मौजूदा व्यवस्था 4 चैनलों की थी। तेजी से बढ रहे संचार माध्यमों को इस फैसले से और भी अधिक गति मिलेगी।