गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) विदर्भ जन आंदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने बताया कि अरुण सबाणे (30) अन्य किसानों के साथ मिलकर कपास और सोयबीन के लिए अच्छी कीमत की मांग को लेकर नारे लगा रहा था। इसीबीच, उसने जहर की एक शीशी निकाली और सभी लोगों के सामने उसे पी गया।
पुलिस ने सबाणे को नजदीक के एक अस्पताल में पहुंचाया लेकिन यहां उसकी हालत में सुधार न होने पर उसे जिले के सरकारी अस्पताल में भेजा गया।
सबाणे की हालत ‘गम्भीर’ बताते हुए तिवारी ने कहा कि इसके अलावा दिसम्बर के पहले चार दिनों में कर्ज में डूबे 10 अन्य किसान पहले ही अपना जीवन समाप्त कर चुके हैं।