उन्होंने कहा कि पूरी पारदर्शिता के साथ इन विमानों की आपूर्ति करने वाली कम्पनी का फैसला किया जाएगा। एंटनी ने यह बात इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालसिस (आईडीएसए) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कही।
एंटनी ने कहा, “लड़ाकू विमानों का सौदा करने के मामले में हम पूरी तरह स्वतंत्र रूप से फैसला लेना चाहते हैं। इसके लिए किसी प्रकार की राजनीतिक पहल पर विचार नहीं किया जाएगा। यह हमारा निर्णय है और इसकी जानकारी सभी को है।”
इस रक्षा खरीद के अंतर्गत कुल छह प्रकार के विमानों की आपूर्ति होनी थी लेकिन अब इनकी संख्या घटाकर दो कर दी गई है। रक्षा मंत्रालय ने यूरोपीयन संघ की कम्पनी ईएडीएस कैसिडियन के यूरोफाइटर टायफून और फ्रांसीसी डासोल्ट राफेल विमानों में से किसी एक को बेड़े में शामिल करने का फैसला किया है।
इस प्रक्रिया से अमेरिका, रूस और स्वीडन की रक्षा कम्पनियां बाहर हो गई है।
भारत जल्द ही इस रक्षा खरीद के आपूर्तिकर्ता के नाम का फैसला करने वाला है। बीते शुक्रवार को इस सम्बंध में वाणिज्यिक निविदाएं रक्षा मंत्रालय के साउथ ब्लाक स्थित मुख्यालय में खोली गईं।
भारतीय वायु सेना को अपने बेड़े को अत्याधुनिक रूप देने के लिए 126 मध्यम बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों की जरूरत है। ये विमान उम्र सीमा को पार कर रहे सोवियत युग के मिग-21 का स्थान लेंगे।