सुनवाई पिछले दो सालों से चल रही थी, जिसमें 42 आरोपियों को बरी कर दिया गया।
आरोपियों पर हत्या, हत्या की कोशिश, लूट खसोट, दंगा करने जैसे कई आरोप लगाए गए थे।
बरी किए गए 42 आरोपियों में से 11 को सबूत के अभाव में छोड़ा गया। बाकी 31 को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया, लेकिन उनमें से प्रत्येक को 25 हजार रुपये का मुचलका भरने तथा बिना इजाजत देश नहीं छोड़ने का आदेश दिया गया।
सर्वोच्च न्यायालय सुनवाई की निगरानी कर रहा था तथा लगातार सुनवाई की रिपोर्ट देख रहा था। मामले की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने एक विश्ेाष जांच दल गठित किया था।