न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की पीठ ने हालांकि जयललिता को थोड़ी राहत देते हुए उनके उस आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने पेशी की तारीख आगे बढ़ाने का आग्रह किया था, क्योंकि निर्धारित तारीख, आठ नवम्बर को न्यायालय में पेश होना उनके लिए सुविधाजनक नहीं था।
यह मामला तब का है, जब जयललिता पहली बार (1991-1996) राज्य की मुख्यमंत्री बनी थीं।