नई दिल्ली ।। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को कहा कि गांधीवादी अन्ना हजारे पक्ष के वरिष्ठ सदस्य शांति भूषण, समाजवादी पार्टी [सपा] के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और सपा के पूर्व नेता अमर सिंह के बीच कथित बातचीत की विवादास्पद सीडी असली है और उसके साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है।
दिल्ली पुलिस ने शांति भूषण के पुत्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा दायर एक शिकायत पर अपनी अंतिम रिपोर्ट में यह बात कही है। प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि सीडी फर्जी रूप से तैयार की गई है।
सीडी में दर्ज वार्ता के अनुसार, शांति भूषण कथितरूप से मुलायम सिंह से वादा करते हैं कि उनके पुत्र प्रशांत भूषण धनराशि देकर न्यायाधीश को अपने ‘पक्ष’ में कर लेंगे।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा, “सीडी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है, और हमने एक अंतिम रिपोर्ट दाखिल की है।”
मुख्य महानगर दंडाधिकारी विनोद यादव के समक्ष पेश अपनी रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस ने कहा, “चूंकि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) दिल्ली और इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम की राय एक है तो ऐसे में इन दोनों रपटों पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है।”
पुलिस की जांच रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत भूषण ने पत्रकारों से कहा, “यह दिल्ली पुलिस, सरकार और सीएफएसएल अधिकारियों के एक वर्ग की साजिश है।”
उल्लेखनीय है कि अन्ना हजारे द्वारा गत अप्रैल में अपना अनशन स्थगित किए जाने के बाद यह सीडी मीडिया में वितरित की गई।
शांति भूषण ने सीडी को फर्जी और अपनी छवि खराब करने की एक कोशिश करार दिया था। उन्होंने इस बारे में दिल्ली पुलिस में भारतीय दंड संहिता की धारा 469 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।
वहीं, भूषण ने इस सीडी की फोरेंसिक जांच हैदराबाद स्थित एक निजी प्रयोगशाला और ट्रथ लैब्स में कराई जहां सीडी को फर्जी बताया गया था।
भूषण को अमेरिकी विशेषज्ञ जार्ज पैपकन और ट्रथ लैब्स द्वारा किए गए फोरेंसिक विश्लेषण अप्रैल में प्राप्त हो गए थे। विश्लेषण में दावा किया गया था कि सीडी में कई सारी खामिया हैं, और कई महत्वपूर्ण स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक एडिटिंग के संकेत हैं।
भूषण ने आरोप लगाया था कि इससे यह साबित होता है कि उद्योगपतियों व राजनीतिज्ञों सहित कई शक्तिशाली लोगों की शह पर न्यायिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए की गई यह एक घृणित साजिश है।














