इलाहाबाद/नई दिल्ली ।। उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा (नोएडा एक्सटेंशन) में भूमि अधिग्रहण के विवादास्पद मामले पर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीन गांवों में अधिग्रहण रद्द दिया है।

अदालत के अन्य गांवों में मुआवजे की राशि बढ़ाने और किसानों को विकसित जमीन का एक हिस्सा देने के फैसले से इस इलाके में निजी कम्पनियों की विभिन्न आवासीय परियोजनाओं के फिर से शुरू होने की सम्भावना बनी है लेकिन असंतुष्ट कुछ किसानों ने सर्वोच्च न्यायालय जाने की बात कही है।

न्यायालय ने दो गांवों की याचिकाएं खारिज करते हुए 58 गांवों के किसानों को 64 प्रतिशत अधिक मुआवजा और 10 फीसदी विकसित जमीन देने के साथ इस मामले में हुई अनियिमतता की जांच के आदेश भी दिए हैं। न्यायमूर्ति एस.यू. खान, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति वी.के.शुक्ल की विशेष पीठ ने इस मामले में अपना फैसला 30 सितम्बर को सुरक्षित कर लिया था।

किसानों के वकील पंकज दुबे ने संवाददाताओं से कहा कि न्यायालय ने ग्रेटर नोएडा और नोएडा के 63 गांवों के किसानों की 491 याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया है। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने ग्रेटर नोएडा के दो गांवों- शाहबेरी और देवला तथा नोएडा के असदुल्लापुर गांव में भूमि अधिग्रहण पूरी तरह रद्द कर दिया। इन गावों में अभी किसी तरह का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था। इन गावों के किसानों से कहा गया है कि वे प्राप्त मुआवजे की राशि लौटाकर अपनी जमीन वापस ले सकते हैं।

दुबे के मुताबिक न्यायालय ने दो गांवों के किसानों की याचिकाएं खारिज कर दीं। बाकी सभी 58 गांवों के किसानों को प्राप्त मुआवजे से 64 फीसदी अधिक मुआवजा और 10 फीसदी विकसित जमीन देने के आदेश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि अदालत ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह प्रमुख सचिव स्तर के किसी अधिकारी को नियुक्त कर ग्रेटर नोएडा और नोएडा में भूमि अधिग्रहण में हुई अनियिमतताओं की जांच कराएं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कारवाई करें। साथ ही कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) योजना बोर्ड की अनुमित के बिना वहां पर कोई नया निर्माण नहीं होगा।

ज्ञात हो कि ग्रेटर नोएडा के 40 और नोएडा के 23 गांवों के किसानों ने न्यायालय में याचिकाएं दायर कर राज्य सरकार के अधीन आने वाली नोएडा अथॉरिटी द्वारा किए गए लगभग 5,000 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को चुनौती दी थी।

अदालत के फैसले से जहां निवेशक, बिल्डर और ज्यादातर किसान खुश हैं वहीं बदौली बांगर, शाखीपुर और असगरपुर जैसे कुछ गांवों के किसानों ने असंतुष्टि भी जताई है।

किसान प्रदीप कुमार ने संवाददाताओं से कहा, “हमें अतिरिक्त मुआवजा नहीं, हमारी जमीन वापस चाहिए। हम अब सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाएंगे।” वहीं किसानों के वकील दुबे ने कहा, “फैसले का अध्ययन करने के बाद हम किसानों के साथ मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे।”

उधर, फैसला आने के कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस ने कहा कि राष्ट्रीय भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव प्रगति पर है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “कोई भी फैसला सभी वर्गो को संतुष्ट नहीं कर सकता।”

उन्होंने कहा कि ‘फैसले से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है, क्योंकि यह अंतिम फैसला नहीं है। दूसरी बात कि राष्ट्रीय भूमि अधिग्रहण कानून में मूलभूत परिवर्तन की प्रक्रिया प्रगति पर है जिसे पूरी होने में थोड़ा वक्त लगेगा’।

सिंघवी ने कहा, “दुर्भाग्यवश इस कानून को बनाने में देरी हो रही है, क्योंकि कांग्रेस हमेशा से इच्छुक रही है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रत्येक साझेदार, विभिन्न राज्यों तथा देश के विभिन्न हिस्सों को साथ लेकर चला जाए।” उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सर्वसम्मति बनने में समय लगेगा।

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