इस्लामाबाद ।। भारत-पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर बेगुनाह लोगों की गिरफ्तारी कोई छोटा मुद्दा नहीं है, और दोनों देशों को कैदियों की अदला-बदली से सम्बंधित एक संयुक्त नीति तैयार करनी चाहिए। यह बात एक पाकिस्तानी समाचार पत्र ने सोमवार को कही है।
‘डेली टाइम्स’ ने अपनी सम्पादकीय में लिखा है, “यह वाकई में भयावह है कि करीब 250 पाकिस्तानी कैदी भारत में हैं और वह भी बगैर किसी न्यायालयी सुनवाई के।”
अखबार ने कहा है, “अक्सर लोगों को अनजाने में सीमा पार करते या विदेशी जल सीमा में प्रवेश करने पर पकड़ लिया जाता है। या फिर वे युद्ध बंदी हैं, क्योंकि ऐसी खबरें हैं कि कुछ पाकिस्तानी कैदी 1965 और 1971 के युद्ध के समय से ही भारतीय जेलों में हैं।”
सम्पादकीय में कहा गया है, “भारतीय और पाकिस्तानी मछुआरों को या सीमा पर मवेशियों को चरा रहे किसानों को गुप्तचर होने के संदेह में पकड़कर कैद करना ही बहुत बुरा है, लेकिन उनके मामले की न्यायिक सुनवाई न होना तो बिल्कुल ही न्यायोचित नहीं है।”
अखबार ने लिखा है, “भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं और इसके कारण अविश्वास को गहरे बैठने का मौका मिला है। लेकिन इसके कारण कैदियों को नजरअंदाज करने और उनके साथ अमानवीय आचरण करने का कोई आधार नहीं बनता।”
अखबार ने आगे कहा है, “सीमा के दोनों तरफ बेगुनाहों को गिरफ्तार करने का मुद्दा छोटा नहीं है और इसे सुलझाया जाना चाहिए।”
सम्पादकीय में कहा गया है, “निश्चितरू से दोनों देशों में इन कैदियों का कोई रिकार्ड होना चाहिए और सरकारों को कैदियों की अदला-बदली के लिए एक संयुक्त नीति तैयार करनी चाहिए।”














