नई दिल्ली ।। बॉलिवुड में पहले की नायिकाएं जहां शर्म में लिपटी दिखतीं थीं, वहीं नई नायिकाएं धड़ल्ले से शराब पीती, मुंह से धुएं के छल्ले निकालती और गालियां देती दिख रही हैं। बीते समय के दौरान बॉलिवुड नायिकाएं अधिक साहसी व शरारती हुई हैं। पहले जहां अभिनेत्रियों पर ‘छोड़ दो आंचल, जमाना क्या कहेगा’ जैसे गीत फिल्माए जाते थे, वहीं इन दिनों ‘आई’एम टू सेक्सी फॉर यू बेब’ जैसे गीत प्रचलन में हैं।
हाल ही में प्रदर्शित हुईं फिल्मों में से ‘रॉकस्टार’ में अभिनेत्री नर्गिस जहां देसी ठर्रा पीने की इच्छा रखती हैं तो वहीं ‘द डर्टी पिक्चर’ में अभिनेत्री विद्या बालन कामोत्तेजक दिखती हैं। ‘प्लेयर्स’ में सोनम कपूर भी कुछ ऐसी ही भूमिका में दिखती हैं। कैटरीना कैफ ‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ में शराब पीती दिखती हैं तो अभिनेत्री रानी मुखर्जी ‘नो वन किल्ड जेसिका’ में खूब गालियां देती हैं।
फिल्म आलोचक उमर कुरैशी ने बताया, “सिनेमा वही दिखाता है, जो समाज में होता है। महिलाओं का घरेलू होना, उनका महत्व कम होना, उनका खामोशी से सब कुछ सहना और पतिव्रता होना बीते दौर की बात हो गई है। पहले की हिंदी फिल्मों में महिलाएं ऐसी ही होती थीं लेकिन समय बदलने के साथ समाज अधिक लोकतांत्रिक व स्वतंत्र विचारों का हो गया है। इसके साथ बड़े पर्दे पर महिलाओं की छवि भी बदली है।”
कुरैशी ने कहा, “वर्तमान महिलाएं ‘दोहरी तनख्वाह, बिना बच्चे’ वाले मंत्र के तहत जीवनयापन कर रही हैं। वे काम पर जाती हैं, कुछ को तो अकेले रहने में भी कोई परेशानी नहीं है। वे सामाजिक होती हैं, पार्टियों में शामिल होती हैं, मद्यपान और धूम्रपान भी करती हैं। इसलिए सिनेमाई पर्दे पर भी वे ऐसी ही दिखती हैं।”
‘देहली बेली’, ‘इश्किया’, ‘शैतान’, ‘तनु वेड्स मनु’, ‘जिस्म’, ‘सात खून माफ’, ‘दम मारो दम’ और ‘गर्लफ्रेंड’ ऐसी कुछ फिल्में हैं, जिनमें महिला किरदार एकदम अलग दिखते हैं। कुछ फिल्मों में तो लड़कियों को धूम्रपान करते, नशा करते और समलैंगिक सम्बंध बनाते भी दिखाया गया है।














