इस्लामाबाद ।। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और सेना प्रमुख अशफाक परवेज कयानी ने मुलाकात कर अमेरिका को भेजे गए फौजी तख्ता पलट की आशंका वाले गोपनीय संदेश पर चर्चा की।

यह जानकारी गुरुवार को मीडिया की ओर से जारी रपट में दी गई। पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी व्यवसायी मंसूर इजाज ने पिछले दिनों यह चौंका देने वाला दावा किया था कि पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनयिक ने जरदारी का अमेरिका के तत्कालीन ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन तक पहुंचाने में मदद मांगी थी।

उनका आरोप है कि अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के गत दो मई को अमेरिकी कमांडो कार्रवाई में मारे जाने के बाद जरदारी को फौज द्वारा तख्ता पलट करने का खतरा महसूस होने लगा था।

‘द न्यूज इंटरनेशनल’ के मुताबिक, जरदारी, गिलानी तथा कयानी ने बुधवार रात राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की । इस बैठक में पाकिस्तान-अमेरिका के सम्बंधों एवं मुलेन को भेजे गए संदेश पर चर्चा की गई। 

राष्ट्रपति के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने कहा है कि प्रधानमंत्री गिलानी राष्ट्रपति जरदारी से भेंट करने के लिए बुधवार रात को ऐवान-ए-सदर आए थे। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात के दौरान कयानी भी मौजूद थे। बैठक में देश के सुरक्षा हालात पर चर्चा की गई।

एक दिन पहले कयानी ने जरदारी से भेंट की थी। इस दौरान भी इस मसले पर चर्चा हुई थी।

अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी को इसी मसले के लिए इस्लामाबाद तलब किया गया है।

गिलानी ने नेशनल असेम्बली को बताया कि हक्कानी को इस्लामाबाद बुलाया गया है। उन्होंने कहा, “वह राजदूत हैं या नहीं , हक्कानी को यहां आना और हुकूमत को इस बारे में बताना ही होगा।”

वहीं, सूचना एवं प्रसारण मंत्री फिरदौस आशिक अवान ने बुधवार को कहा कि सरकार और सेना के नेतृत्व के बीच कोई मतभेद नहीं है। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर दोनों साथ हैं।

हक्कानी को इस्लामाबाद तलब किए जाने के सवाल पर उन्होंने इसे नियमित मामला करार दिया और कहा कि राजदूतों को अक्सर तलब किया ही जाता है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।

हाल के दिनों में पाकिस्तान तथा अमेरिका के सम्बंधों में आए उतार-चढ़ाव को देखते हुए उन्हें दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सम्बंधों पर चर्चा के लिए बुलाया गया है।

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