facts about jagannath temple puri
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उड़ीसा राज्‍य के पुरी में स्थित जगन्‍नाथ मंदिर रहस्‍यों से भरा हुआ है। ये मंदिर ना केवल प्राचीन है बल्कि इससे कई चमत्‍कार और रहस्‍यों का संबंध भी है। पुरी का जग्‍न्‍नाथ मंदिर चार धाम की यात्रा में से एक है।

जगन्‍नाथ पुरी के दर्शन

पुरी में स्थित इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। कहते हैं कि इस मंदिर में स्‍थापित भगवान जगन्‍नाथ का स्‍वरूप पृथ्‍वी पर और कहीं देखने को नहीं मिलता है। यहां पर भगवान का विग्रह नीम की लकड़ी से बना है जो कि अद्भुत है। मान्‍यता है कि इसके अंदर स्‍वयं श्रीकृष्‍ण बसते हैं।

जगन्‍नाथ पुरी मंदिर की रथ यात्रा

आषाढ़ मास की शुक्‍ल पक्ष की द्वितीया तिथि को उडीसा के पुरी शहर में भगवान जगन्‍नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। इस रथ यात्रा का गुणगान ना केवल भारत बल्कि दुनियाभर में होता है। इसमें हिस्‍सा लेने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु और भक्‍त आते हैं। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्‍नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को रंग और सजावट से सजाया जाता है। इन रथों को सजाने का कार्य सालसभर चलता है। इस रथ यात्रा का आयोजन हर साल जुलाई के महीने में होता है।

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जगन्‍नाथ मंदिर का इतिहास

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि वर्तमान में स्थित मंदिर के स्‍थान पर पूर्व में एक बौद्ध स्‍तूप हुआ करता था। उस स्‍तूप में गौतम बुद्ध का एक दांत रखा था। बाद में इसे इसकी वर्तमान स्थित कैंडी श्रीलंका पहुंचा दिया गया। दसवीं शताब्‍दी के दौरान जगन्‍नाथ अर्चना को लोकप्रियता प्राप्‍त हुई। उस समय उड़ीसा में सोमवंशी राजवंश का शासन हुआ करता था। महाराजा रणजीत सिंह, महान सिख सम्राट ने इस मंदिर को अकूट स्‍वर्ण का दान किया था। उन्‍होंने विश्‍व प्रसिद्ध कोहिनूर को भी इस मंदिर के नाम कर दिया था। अगर अंग्रेज़ इसे ना चुराते तो आज कोहिनूर भगवान जगन्‍नाथ के मुकुट की शान होता।

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जगन्‍नाथ पुरी मंदिर के आश्‍चर्यजनक तथ्‍य

  • जगन्‍नाथ मंदिर में स्‍थापित ना केवल प्रतिमा अद्भुत है बल्कि ये मंदिर भी चमत्‍कारों से भरा है। इस मंदिर की चोटि पर लगा झंडा हर समय विपरीत दिशा में लहराता है।
  • इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि मंदिर की चोटी पर लगा सुदर्शन चक्र चारों दिशाओं से सामने लगा ही प्रतीत होता है।
  • जगन्‍नाथ मंदिर की रसोई भी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए सात बर्तन एक दूसरे पर रखे जाते हैं। ये प्रसाद लकड़ी जलाकर पकाया जाता है एवं रोचक बात ये है कि इस प्रक्रिया में सबसे ऊपर के बर्तन का प्रसाद सबसे पहले पकता है।
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  • पुरी में हवा सामान्‍य दिशा से विपरीत दिशा में चलती है। यहां पर हवा दिन में समुद्र की ओर और रात में मंदिर की ओर बहती है।
  • आमतौर पर हर मंदिर के गुंबद की छाया धरती पर दिखाई देती है लेकिन जगन्‍नाथ मंदिर की छाया किसी भी समय धरती पर नहीं पड़ती।
  • आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि आज तक कभी भी मंदिर की रसोई में भोजन की कमी नहीं पड़ी है जबकि यहां हर रोज़ हज़ारों भक्‍त भोजन करते हैं। इसके बावजूद मंदिर का भंडार सालभर भरा रहता है।
  • आमतौर पर हर मंदिर या इमारत के शिखर पर पक्षी बैठते हैं लेकिन जगन्‍नाथ मंदिर के शिखर पर कोई पक्षी नहीं बैठता।
  • माना जाता है कि इस मंदिर में भगवान जगन्‍नाथ की मूर्ति में स्‍वयं श्रीकृष्‍ण के प्राण बसते हैं।

जिस किसी ने भगवान कृष्‍ण के इस रूप में दर्शन कर लिए उसका जीवन धन्‍य हो जाता है। जगन्‍नाथ धाम की यात्रा को हिंदू धर्म की प्रमुख तीर्थयात्रा चारधाम में से एक माना जाता है। अगर आप इस मंदिर के दर्शन कर प्रभु का आर्शीवाद पाना चाहते हैं तो जुलाई के महीने में यहां आना सबसे ठीक रहेगा क्‍योंकि इस दौरान आप विश्‍वप्रसिद्ध जगन्‍नाथ रथ यात्रा का आनंद भी ले सकते हैं।

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रहस्‍यों और चमत्‍कारों से जुड़ा है पुरी का जगन्‍नाथ मंदिर
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