नई दिल्ली, Hindi7.com ।। सरकार से बातचीत के लिए दिल्‍ली पहुंचे अन्‍ना हजारे ने कड़े तेवर अपना लिये हैं। उनके सहयोगियों ने भी साफ कर दिया है कि सरकार मजबूत लोकपाल लाने के पक्ष में नहीं है और ऐसे में अनशन ही एक मात्र रास्‍ता रह गया है। संसदीय समिति के सामने अपनी बात रखने के लिए अन्‍ना दिल्‍ली आए हैं।

अन्ना और उनकी टीम ने कहा कि उन्हें मजबूत लोकपाल से कम कुछ भी स्वीकार नहीं। उन्होंने आशंका जताई कि स्टैंडिंग कमिटी के साथ मीटिंग सिर्फ दिखावा है, इससे कुछ होने वाला नहीं। उन्होंने कहा कि अब अनशन ही एकमात्र रास्ता रह गया है। इससे पहले आज दोपहर में आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए अन्ना हजारे  ने सिविल सोसाइटी के सदस्य प्रशांत भूषण के निवास पर अपने साथियों के साथ मुलाकात की।

दिल्ली पहुंचने के बाद अन्ना ने कहा कि देश की जनता यह समझ चुकी है कि मौजूदा सरकार भ्रष्‍टाचार से लड़ने में सक्षम नहीं है। उनके साथ मौजूद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने लोकपाल बिल का जो मसौदा सदन में पेश किया है, उस पर चर्चा कर समय की बर्बादी के सिवा कुछ हासिल नहीं होगा। अब अनशन ही एक मात्र रास्‍ता है।

उधर, कांग्रेस ने टीम अन्‍ना को एक बार फिर बातचीत के मंच पर लाने में कामयाबी पा ली है। टीम अन्‍ना ने संसद की स्‍थायी समिति [कानून और न्‍याय मामले की] के सामने अपनी बात रखने की गुजारिश मान ली है। इस समिति के अध्‍यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी हैं।

टीम अन्‍ना के सदस्‍य अरविंद केजरीवाल ने बताया कि उन्‍हें राज्‍यसभा सचिवालय की ओर से संसदीय समिति के सामने अपनी बात रखने के लिए बुलाया गया है। उन्‍होंने कहा कि हालांकि यह एक औपचारिकता ही है, फिर भी हम आपस में विचार कर तय करेंगे कि समिति को क्‍या कहना है ?

टीम अन्‍ना की मुख्‍य मांग है कि प्रस्‍तावित लोकपाल बिल के दायरे में प्रधानमंत्री और न्‍यायपालिका को भी रखा जाए। यह मांग मनवाने के लिए अन्‍ना हजारे और उनके समर्थक देश भर में आंदोलन कर रहे हैं और 16 अगस्‍त से अनशन भी करने वाले हैं। लेकिन इससे पहले एक बार उन्‍हें बातचीत में शामिल करने की कांग्रेस की कोशिश को आंदोलन कमजोर करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि इस पहल से यह संदेश देने की भी कोशिश होगी कि सरकार टीम अन्‍ना की मांग पर सख्‍त रुख अपनाए नहीं बैठी है, बल्कि बातचीत का रास्‍ता अपना रही है।

लोकपाल बिल सरकार की ओर से लोकसभा में पेश किया जा चुका है। मंगलवार को निर्दलीय सांसद राजीव चंद्रशेखर ने राज्‍यसभा में भी इसे पेश किया। टीम अन्‍ना सरकार पर आरोप लगाती रही है कि वह मजबूत लोकपाल लाने के पक्ष में नहीं है और इसके लिए उनके आंदोलन को भी कमजोर करना चाहती है।

अन्‍ना ने मंगलवार को सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार उनके पीछे लग गई है। वह सेना में नौकरी के दिनों के रिकॉर्ड खंगाल रही है और अपने लोगों को महाराष्‍ट्र भेज कर उनके संगठन का कामकाज बाधित करना चाह रही है।

अन्‍ना ने मंगलवार को मुंबई प्रेस क्‍लब में बताया था कि सरकार सेना में मेरा रिकॉर्ड जंचवा रही है। उन्‍हें लग रहा है कि उन दिनों के दौरान की गई किसी गड़बड़ी का पता चल जाएगा, लेकिन मैंने पूरी जिंदगी में कभी कुछ गलत नहीं किया। उन्‍होंने मेरे पीछे अपने लोग लगा दिए हैं। उन्‍हें मेरे गांव तक भेजा, ताकि मेरी संस्‍था में किसी गड़बड़ी का सुराग मिल सके। मेरे पास कोई बैंक बैलेंस नहीं है। आपको क्‍या मिलेगा? हजारे ने सेना में 15 साल तक नौकरी की है।

इस बीच, पुणे के चैरिटी कमिश्‍नर ने अन्‍ना हजारे के हिंद स्‍वराज ट्रस्‍ट को क्‍लीन चिट दे दी है। राष्‍ट्रीय भ्रष्‍टाचार विरोधी जनशक्ति के अध्‍यक्ष हेमंत पाटिल ने 26 अप्रैल को ट्रस्‍ट के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत में वित्‍तीय अनियमितता का आरोप लगाया गया था, लेकिन असिस्‍टेंट चैरिटी कमिश्‍नर एनवी जगताप ने जांच के बाद ट्रस्‍ट को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।

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