नई दिल्ली ।। केंद्र सरकार अन्ना हजारे के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल को घेरने की कोशिश में लगी है।



केजरीवाल भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी थे और उन्होंने फरवरी, 2006 में अपने पद से इस्तीफा दिया था। जांच में आयकर विभाग ने पाया है कि केजरीवाल ने जरूरी सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है। इसी आधार पर आयकर बोर्ड ने उनको नौ लाख रूपए चुकता करने का नोटिस थमाया है।


यह नोटिस रामलीला मैदान में अन्ना के अनशन से पहले ही केजरीवाल को थमा दिया गया था, जिसका जवाब उन्होंने गुरूवार को सौंपा है। आयकर विभाग का कहना है कि “केजरीवाल ने अपनी संक्षिप्त सेवा अवधि के दौरान अध्ययन अवकाश लिया था और उसके बाद इस्तीफा दिया था, परंतु नियमों के मुताबिक, बकाये का भुगतान नहीं किया। इसमें दो साल का वेतन और उस पर लगा ब्याज शामिल है।”


आयकर विभाग के मुताबिक, अरविंद ने 50 हजार रूपए का एक कंप्यूटर लोन भी लिया था, जिसका ब्याज एक लाख रूपए से ज्यादा हो चुका है।


उधर, केजरीवाल का कहना है कि “उन्होंने वर्ष 2000 में अध्ययन अवकाश लिया था, जिसकी अवधि अक्तूबर 2002 में खत्म हो गई और उन्होंने नवंबर में फिर से काम करना शुरु कर दिया था। इसके तीन साल से ज्यादा समय बाद फरवरी 2006 में उन्होंने इस्तीफा दिया, इसलिए नियमों के तहत उन पर किसी तरह का कोई बकाया नहीं बनता।”


टीम अन्ना के एक और सदस्य कुमार विश्वास को भी आयकर विभाग का नोटिस भेजा गया है। कुमार विश्वास को भेजे गए नोटिस में उनसे अडवांस में टैक्स डिक्लेअर करने को कहा गया है।


उधर, टीम अन्‍ना के अहम सहयोगियों में से एक किरण बेदी ने कहा है कि “उन्‍हें नोटिस की परवाह नहीं है। उन्‍होंने कुछ गलत नहीं किया है।


गौरतलब है कि बेदी ने रामलीला मैदान के मंच से अभिनय कर बताया था कि नेता मुखौटा ओढ़े रहते हैं और कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ की बातें करते रहते हैं। उनके इस ‘अभिनय’ और बयान के लिए कई सांसदों ने सदन में विशेषाधिकार हनन का नोटिस पेश किया है।

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